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टिंडा
टिंडा
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सामान्य जानकारीATION
टिंडे को round melon, round gourd, Indian squash भी कहा जाता है| यह उत्तरी भारत की सबसे महत्तवपूर्ण गर्मियों की सब्जी है। टिंडे का मूल स्थान भारत है। यह कुकरबिटेसी प्रजाति से संबंधित है। इसके कच्चे फल सब्जी बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। 100 ग्राम अन-पके फलों में 1.4% प्रोटीन, वसा 0.4%, कार्बोहाइड्रेट 3.4%, कैरोटीन 13 मि.ग्रा. और 18 मि.ग्रा. विटामिन होते हैं। इसके फल की औषधीय विशेषताएं भी हैं, सूखी खांसी और रक्त संचार सुधारने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
जलवायु
सामान्य तापमान
15-28°C
वर्षा
200-300MM
बुवाई के समय तापमान
10-20°C
कटाई के समय तापमान
20-28°C
मिट्टी
बढ़िया विकास और पैदावार के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च जैविक तत्वों वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7 होनी चाहिए। पानी के ऊंचे स्तर वाली मिट्टी में यह बढ़िया पैदावार देती है|
ज़मीन की तैयारी
मिट्टी के भुरभुरा होने तक ज़मीन की जोताई करें। गाय का गला हुआ गोबर 8-10 टन प्रतिकिलो खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ में डालें। खेती के लिए बैड तैयार करें। बीजों को गड्ढों या खालियों में बोया जा सकता है।
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
UREA | SSP | MOP |
70 | 150 | 40 |
आर्गेनिक खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
BIO DAP | NPK | MIX FERTILIZERS |
150 | 100 | 100 |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
32 | 24 | 24 |
टिंडे की पूरी फसल को 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद व कम्पोस्ट, नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो), और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के दो से तीन सप्ताह पहले डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे। पहले भाग को बिजाई के 25-30 दिन बाद डालें और दूसरे भाग को बिजाई के 40-50 दिन बाद डालें।
काले पॉलीथीन मल्च का प्रयोग करने से खरपतवारो की रोकथाम होगी और मिट्टी में भी नमी बनी रहेगी। खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए, हाथों से गोडाई करें और खरपतवारो की जांच करते रहें। बिजाई के बाद 15-20 दिनों के बाद हाथों से गोडाई करें। खरपतवारो की तीव्रता के आधार पर बाकी की गोडाई करें।
इसे लगातार सिंचाई की जरूरत होती है क्योंकि यह कम समय की फसल है। बीजों को सिंचाई से पहले खालियों में बोया जाये, तो पहली सिंचाई बिजाई के बाद दूसरे या तीसरे दिन करें। गर्मियों के मौसम में, 4-5 दिन के फासले पर जलवायु, मिट्टी की किस्म, के अनुसार सिंचाई करें। बारिश के मौसम में बारिश की आवृति के आधार पर सिंचाई करें। टिंडे की फसल को ड्रिप सिंचाई देने पर अच्छा परिणाम मिलता है और 28% पैदावार बढ़ाता है।
पौधे की देखभाल  
एंथ्राक्नोस :

चेपा:

सफेद धब्बे :

फसल की कटाई
किस्म के आधार पर बिजाई के 60 दिनों में फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। जब फल पक जाएं और मध्यम आकार के हो जायें तब तुड़ाई कर लें। 4-5 दिनों के फासले पर तुड़ाई करें
बीज उत्पादन
चप्पन कद्दू की अन्य किस्मों से 800 मीटर का फासला रखें। प्रभावित पौधों को खेत में से बाहर निकाल दें| जब फल परिपक्व हो जाएं तब वे हल्के रंग के हो जाते हैं| फिर उन्हें ताज़े पानी में डालकर हाथों से मसला जाता है और बीजों को गुद्दे से अलग किया जाता हैं। जो बीज पानी की निचली सतह पर बैठ जाते है, उन्हें बीज उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है|