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फूलगोभी
फूलगोभी
- रबी/जून का दूसरा सप्ताह-जुलाई का पहला सप्ताह
- किस्में
- खादें
- किट और रोगो के प्रकार
सामान्य जानकारीATION
फूलगोभी एक लोकप्रिय सब्जी है और क्रूसिफेरस परिवार से संबंधित है। इसका फूल विभिन्न रंगों जैसे क्रीम, सफेद, हरे या जामुनी रंग में आता है। फूल गोभी कैल्शियम और खनिजों का उच्च स्त्रोत है। यह कैंसर की रोकथाम के लिए प्रयोग की जाती है। यह सब्जी दिल के स्वास्थ्य और कोलैस्ट्रोल भी कम करती हैं। फूल गोभी बीजने वाले मुख्य राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आसाम, हरियाणा और महाराष्ट्र हैं।
जलवायु
सामान्य तापमान
20-30°C
वर्षा
120-125CM
बुवाई के समय तापमान
25-30°C
कटाई के समय तापमान
12-18°C
मिट्टी
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं। पिछेती बिजाई की किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है और जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए रेतली दोमट मिटटी की सिफारिश की जाती है| मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए। मिट्टी का pH कम होने पर उसमें चूना डालें|
ज़मीन की तैयारी
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 3-4 बार जोताई करें और उसके बाद मिट्टी को समतल करें। आखिरी जोताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें।
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| UREA | DAP or SSP | MOP | ZINC | |
| 130 | 155 | 40 | – | |
आर्गेनिक खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| BIO-DAP | MIX FERTILIZER | Organic NPK | |
| 200 | 100 | 100 | |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
| N | P2O5 | K |
| 60 | 25 | 25 |
खरपतवार को रोकने के लिए फसल को खेत में लगाने के बाद फलुक्लोरालिन (बसालिन) 1-2 लीटर प्रति 800 मि.ली.को 200 लीटर पानी का छिड़काव करें और 30-40 दिनों के बाद रोपाई करें। फसल को खेत में लगाने से 1 दिन पहले पैंडीमैथलीन 1 लीटर प्रति एकड़ में छिड़काव करें।
फसल को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई करें। मिट्टी और वातावरण के अनुसार गर्मियों में 7-8 दिनों के बाद और सर्दियों में 10-15 दिनों के बाद सिंचाई करें।
पौधे की देखभाल  
रस चूसने वाले कीड़े
रस चूसने वाले कीड़े ये कीट पत्तों से रस चूसते हैं जिसके कारण पत्ते पीले पड़ जाते हैं और गिर जाते हैं। थ्रिप्स के कारण पत्ते मुड़ जाते हैं। पत्ते कप के आकार के या ऊपर की तरफ मुड़ जाते हैं।
यदि नुकसान ज्यादा हो तो इमीडाक्लोपरिड 17.8 एस एल 60 मि.ली. प्रति एकड़ प्रति एकड़ 150 लि. पानी में डाल कर छिड़काव करें। यदि खेत में थ्रिप्स का नुकसान दिखे तो टराईज़ोफोस, डैल्टामैथरीन 20 मि.ली. साईपरमैथरीन 5 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।
चमकीली पीठ वाला पतंगा :
चमकीली पीठ वाला पतंगा : यह फूल गोभी का एक महत्तवपूर्ण कीड़ा है जो कि पत्तों के नीचे की ओर अंडे देता है। हरे रंग की सुंडी पत्तों को खाती है और उनमें छेद कर देती है यदि इसे ना रोका जाए तो 89-90 % तक नुकसान हो सकता है।
शुरूआत में नीम की निंबोलियों का रस 40 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें और 10-15 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें । इसके बिना बी टी घोल 500 ग्राम रोपाई के 35 और 50 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें। यदि नुकसान बढ़ जाये तो स्पिनोसैड 2.5 प्रतिशत एस सी 80 मि.ली. को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
पत्तों के निचले धब्बे:
पत्तों के निचले धब्बे: यदि लीफ स्पॉट या ब्लाइट का उल्लंघन देखा जाता है, तो नियंत्रण के लिए मेटलैक्सिल 8% + मैनकोजेब 64% डब्ल्यूपी @ 250 ग्राम / 150 लीटर पानी के साथ-साथ स्टीकर या मैनकोजेब @ 400 ग्राम / 150 ग्राम या कार्बेन्डाजिम @ 400 ग्राम / 150 सेंटीमीटर पानी का छिड़काव करें।
पत्तों पर धब्बे और झुलस रोग:
पत्तों पर धब्बे और झुलस रोग: यदि इसका हमला दिखे तो मैनकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 300 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर 20 मि.ली. स्टिकर के साथ स्प्रे करें।
मुरझाना :
सूखा रोग :फसलों के पीलेपन के साथ-साथ पूरी पत्तियों का गिरना। पूरे पौधे की विल्टिंग या सुखाने को देखा जाता है। यह रूट सड़ांध के कारण हो सकता है। जड़ सड़ांध के कारण विल्ट के कारण को नियंत्रित करने के लिए, ट्राइकोडर्मा जैव कवक@2.5 किलोग्राम / 500 लीटर पानी, पौधों की जड़ों के पास। फफूंद जनित रोगों से फसल के नुकसान की जाँच करते रहना। रिडोमिल गोल्ड@2.5 ग्राम / लीटर पानी के साथ रिंच रूट ज़ोन। जरूरत आधारित सिंचाई दें। बाढ़ सिंचाई से बचें।
फसल की कटाई
पूरा फूल विकसित होने पर सुबह के समय फुलों की कटाई की जा सकती है और कटाई के बाद फूलों को ठंडी जगह पर रखना चाहिए।
कटाई के बाद
कटाई के बाद फूलों को आकार के अनुसार अलग अलग करें। यदि मांग और मूल्य ज्यादा हो तो कटाई जल्दी की जा सकती है।