- Home
- प्याज (खरीफ)
प्याज (खरीफ)
प्याज (खरीफ)
- खरीफ/मई-जून
- किस्में
- खादें
- किट और रोगो के प्रकार
सामान्य जानकारीATION
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है| इसको रसोई के कार्यो में प्रयोग किया जाता है| इसके इलावा इस के कड़वे रस के कारण इसे कीटों की रोकथाम, कांच और पीतल के बर्तनों को साफ करने के लिए और प्याज़ के घोल को कीट-रोधक के तौर पर पौधों पर स्प्रे करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है| ताजा खाने के साथ साथ इसका प्रयोग फ्लेक्स, पाउडर और पेस्ट के रूप में किया जाता है। बड़े प्याज की तुलना में छोटे प्याज में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। भारत प्याज़ की खेती के क्षेत्र में पहले और उत्पादन के तौर पर चीन के बाद दूसरे स्थान पर है| क्षेत्र और उत्पादकता के आधार पर कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्रा प्रदेष के बाद महाराष्ट्र मुख्य प्याज उत्पादक है।
जलवायु
सामान्य तापमान
21-26°C
वर्षा
60-80CM
बुवाई के समय तापमान
18-20°C
कटाई के समय तापमान
25-30°C
मिट्टी
इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है| यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है| विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है| इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए|
ज़मीन की तैयारी
खेत को 3-4 बार जोतकर नर्म करें और जैविक खनिजों को बढ़ाने के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्टडालें। खेत को समतल करके क्यारियों और खालियों में बांट दें।
UREA | SSP | MURIATE OF POTASH |
65 | 100 | 30 |
BIO DAP | NPK | MIX FERTILIZER |
100 | 100 | 100 |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
30 | 16 | 16 |
शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है| इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक खरपतवार-नाशक का प्रयोग करें| रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें| खरपतवारो के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें| नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है| पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें|
मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें| आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें |बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें। पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें। अत्याधिक सिंचाई ना करें।
पौधे की देखभाल  
थ्रिप्स :

सफेद सुंडी:

जामुनी धब्बे और तने का फाइलियम झुलस रोग :

फसल की कटाई
सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है| खुदाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है| 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल खुदाई के लिए तैयार है| फसल की खुदाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है| खुदाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे|
कटाई के बाद
खुदाई और पूरी तरह से सूखने के बाद, गांठों को आकार अनुसार छांट ले|