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चुकंदर
चुकंदर
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सामान्य जानकारीATION
चुकंदर को गार्डन बीट के रूप में भी जाना जाता है। यह स्वाद में मीठा होता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। इसके औषधीय विशेषताएं भी हैं जैसे इसका उपयोग कैंसर और दिल की बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है। इसे आसानी से उगाया जा सकता है और यह भारत में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली पहली 10 सब्जियों में से एक है।
मिट्टी
चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी की पी एच 9.5 होनी चाहिए। इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।
ज़मीन की तैयारी
खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें। बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें। आखिरी जोताई से पहले, ज़मीन को कुतरा सुंडी, दीमक और अन्य कीटों से बचाने के लिए क्विनलफॉस 250 मि.ली. प्रति एकड़ से ज़मीन का उपचार करें।
- बिजाई सीड ड्रिल से की जाती है।
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
UREA | DAP or SSP | MOP | ZINC | |
90 | 125 | 50 | – |
आर्गेनिक खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
BIO-DAP | MIX FERTILIZER | Organic NPK | |
150 | 100 | 100 |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
N | P2O5 | K |
40 | 20 | 28 |
अंकुरण के 25-30 दिनों के बाद पहली गोडाई करें। दूसरी गोडाई, पहली गोडाई के 15-20 दिनों के बाद करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए, 2-3 निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है।
चुकंदर को 6-7 सिंचाइयों द्वारा 80-100 सैं.मी. पानी की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बिजाई के 25 दिन बाद और अगली 4 सिंचाइयां 25 दिनों के अंतराल पर करें और बाकी की सिंचाइयां 20 दिनों के अंतराल पर करें।
पौधे की देखभाल  
सुंडी :

सुंडी : यदि इसका हमला दिखे तो बचाव के लिए डाइमैथोएट 30 ई सी 200 मि.ली. को प्रति एकड़ में डालें।
भुंडी :

चेपा और तेला :

पत्तों के निचले हिस्सों पर धब्बा रोग

उपचार : Spray with Mancozeb@400gm in 150ltr water per acre.
आल्टरनेरिया और सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बा रोग :

आल्टरनेरिया और सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बा रोग : यदि इसका हमला दिखे तो इस बीमारी को दूर करने के लिए मैनकोजेब 400 ग्राम को 100-130 लीटर में डालकर स्प्रे करें।
फसल की कटाई
इस फसल की पुटाई अंत अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है। जब पत्तों की निचली सतह पीले रंग की हो जाये तब पुटाई की जाती है। पुटाई के 1-3 दिन पहले हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है।