पेठा

सामान्य जानकारीATION

पेठे को सफेद कद्दू, सर्दियो का खरबूज़ा या धुंधला ख़रबूज़ा भी कहा जाता है| इसका मूल स्थान दक्षिण-पूर्व एशिया है| यह वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और रेशे का उच्च स्त्रोत है| पेठे के बहुत सारे औषधीय गुण हैं। इसमें केलोरी कम होने के कारण यह शुगर के मरीज़ो के लिए बहुत अच्छी है| इसका प्रयोग कब्ज़, एसिडिटी और आंतड़ी के कीट के उपचार के रूप में भी किया जाता है| प्रसिद्ध खाने वाली वस्तु पेठा भी इसी से बनाई जाती है| पेठे की दो किस्में उपलब्ध होती हैं जामुनी हरा और हरा पेठा। उत्तर प्रदेश में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है और इसका मुख्य तौर पर पेठा बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
 
In Uttar Pradesh, it is cultivated on larger scale and it is mainly used for making “Petha”.

मिट्टी

इसकी खेती लगभग सभी किस्म की मिट्टी में की जा सकती है, पर रेतली दोमट मिट्टी में यह बढ़िया पैदावार देती है| मिट्टी का उचित pH 6-6.5 होना चाहिये

ज़मीन की तैयारी

मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा करने के लिए 3-4 बार जोताई करें| अंत में, जोताई करने से पहले 20 किलो गोबर की खाद , 40 किलो नीम केक को एक साथ मिलाकर प्रति एकड़ डालने से अच्छा परिमाण मिलता है

Kashi Ujawal: इस किस्म के फल गोल और बीज रहित होते हैं। यह 130-140 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 240-244 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। Fruits are round with less seeds. It is ready to harvest in 130-140 days. Gives average yield of 240-244 Quintal/acre.
 
दूसरे राज्यों की किस्में
 
CO 1, CO 2, Pusa Ujjwal, MAH 1, IVAG 502
बीज की मात्रा
एक एकड़ में बिजाई के लिए 2-2.5 किलो बीज पर्याप्त होते हैं।
 
बीज का उपचार
बीज को मिट्टी में पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीज का उपचार करें| रसायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडर्मा विराइड 4 ग्राम या सिओडोमोनस फ्लूरोसेंस 10 ग्राम के साथ प्रति किलो बीज का उपचार करें|
बुआई का समय
उत्तरी भारत में इसकी खेती दो बार की जाती है| इसकी बिजाई फरवरी-मार्च में और जून जुलाई में भी की जाती हैं| 
 
फासला
कतारों में 1.5-2.5 मीटर फासले का प्रयोग करें और पौधे से पौधे में 60-120 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। बैड के दोनों ओर प्रति क्यारी पर 2 बीज बोयें। 
 
गहराई
बीज को 1-2 सै.मी. गहराई पर बोयें| 
 
बिजाई का ढंग 
बीज को सीधा ही बैडों पर बोया जाता है|
 

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREADAP or SSPMOPZINC
70 15040

आर्गेनिक खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

BIO-DAPMIX FERTILIZEROrganic NPK
150100 100

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NP2O5K
322424

मुख्यातः फसल में अच्छी तरह सदी हुई गोबर की खाद 8-10 टन, नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में जरूरत होती है| गाय का गला हुआ गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बिजाई से 2-3 सप्ताह पहले डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को दो हिस्सों में बांटे। पहले भाग को बिजाई के 25-30 दिन बाद और दूसरे भाग को बिजाई के 40-50 दिन बाद डालें।

खर पतवार के अनुसार खर पतवार को हाथ से या कुदाल से निकाल देना चाहिए। पानी की बचत के साथ खरपतवार की वृद्धि को रोकने के लिए मल्चिंग सबसे अच्छा तरीका है।

बुआई के बाद तीन से चार दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। वानस्पतिक अवस्था में, जलवायु और मिट्टी की किस्म के आधार पर, गर्मियों के मौसम में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। बारिश के मौसम में, बारिश की तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें। फूल और फल निकलने की अवस्थाएं की अवस्था में सिचाई की जरुरत होती है । इन अवस्थाओं में पानी की कमी ना होने दें।

पौधे की देखभाल
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भुन्डी:

भुन्डी: अगर इसका हमला दिखाई दें तो रोकथाम के लिए मैलाथियान 50 ई सी 1 मि.ली या डाइमेथोएट 30 ई सी 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें|

 

चेपा:

चेपा: अगर इसका हमला दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें|

पत्तों का धब्बा रोग:

पत्तों का धब्बा रोग: नुकसान हुए पौधों के ऊपर वाले हिस्से और मुख्य तने पर भी सफेद धब्बे दिखाई देते है| यह बीमारी पौधे को भोजन के रूप में प्रयोग करती है| गंभीर हमला होने पर इसके पत्ते झड़ जाते है और फल पकने से पहले ही गिर जाते है| अगर इसका हमला दिखाई दें तो डाइनोकॉप 1 मि.ली. या कार्बेन्डाजिम 0.5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें 
 
पत्तों के निचले हिस्सों पर धब्बा रोग: यदि इसका हमला दिखे तो मैनकोजेब या क्लोरोथालोनिल 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें।

पत्तों के निचले हिस्सों पर धब्बा रोग 

पत्तों के निचले हिस्सों पर धब्बा रोग यदि इसका हमला दिखे तो इस बीमारी को दूर करने के लिए मैनकोजेब 400 ग्राम को 100-130 लीटर में डालकर स्प्रे करें।
उपचार : Spray with Mancozeb@400gm in 150ltr water per acre.

फसल की कटाई

किस्म के आधार पर फसल 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है|मांग के मुताबिक फलों की तुड़ाई पकने के समय या उससे पहले की जा सकती है| पके हुए फलों को ज्यादातर बीज उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है| फलों को तेज़ चाकू के साथ बेल के पास से काटें|

कटाई के बाद

फलों को 70-75 प्रतिशत आर्द्रता के साथ 13-15 डिगरी सेल्सियस तापमान पर तीन महीने के लिए स्टोर किया जा सकता है।

बीज उत्पादन

बीज उत्पादन के लिए बीजों को फरवरी मार्च के महीने में बोयें। बीमार और अनचाहे पौधों को फूल निकलने के समय, फल बनने के समय और पकने की अवस्था में निकाल दें। जब फल और तने की सतह सफेद मोम की तरह दिखने लग जाए, तब फल तुड़ाई के लिए तैयार होते हैं। बीजों को अलग करें और फिर पानी से धोयें। धोये हुए बीजों को सुखाएं और स्टोर करने से पहले उन्हें साफ करें। बीजों को कम तापमान और कम नमी वाली स्थितियों पर स्टोर किया जाता है।

खादें


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