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कद्दू
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सामान्य जानकारीATION
यह गर्म मौसम की फसल है और जड़ी बूटी वाली वार्षिक बेल है। इसके फल कई किस्मों के आकार, बनतर और रंग में आते हैं। यह फसल कुकुरबिटेशियस परिवार से संबंधित है। यह विटामिन ए, कैलशियम और फासफोरस का उच्च स्त्रोत है। इसे पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और नेट हाउस में उगाया जा सकता है। इसके स्वास्थ्य लाभ भी हैं जैसे यह शूगर को नियंत्रित करने में मदद करता है, यह अस्थमा के मरीज़ों, दिल के मरीज़ों, आंख और त्वचा की बीमारियों और हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीसेप्टिक और एंटीफंगस विशेषताएं होती हैं।
मिट्टी
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है। रेतली दोमट से दोमट मिट्टी चप्पन कद्दू की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी होती है। चप्पन कद्दू की खेती के लिए मिट्टी का पी एच 5.5-6.5 होना चाहिए।
ज़मीन की तैयारी
चप्पन कद्दू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 जोताई करें। उसके बाद हैरो से जोताई करें। 2 मीटर के फासले पर 15 सैं.मी. गहरी खालियां बनायें।
हाइब्रिड किस्में:
PAU Magaz Kaddoo-1: Released in 2018. The variety is also used for making Magaz and snacks. It has hull-less seeds, dwarf vines and dark green color leaves. It has medium sized fruits which is round and turns golden yellow at maturity. The seed contains 32% omega-6, 3% protein and 27% oil content. It gives an average yield of 2.9qtl/acre of seeds.
PPH-1: Released in 2016. Extra early maturing variety. They have dwarf vines, short internodal length and dark green color leaves. It contains small fruits which are round in shape. The fruit is mottled green in color when immature and at maturity stage it becomes mottled brown in color. Fruit contains golden yellow color flesh. It gives an average yield of 206qtl/acre.
PPH-2: Released in 2016. Extra early maturing variety. They have dwarf vines, short internodal length and green color leaves. It contains small fruits which are round in shape. The fruit is light green in color when immature and at maturity stage it becomes smooth brown in color. Fruit contains golden yellow color flesh. It gives an average yield of 222qtl/acre.
Punjab Samrat (Released in 2008): They have medium long vines, angular stem and dark green color leaves. It contains small fruits which are round in shape. The fruit is mottled green in color when immature and at maturity stage it becomes pale brown in color. Fruit contains golden yellow color flesh. It gives an average yield of 165qtl/acre.
दूसरे राज्यों की किस्में
CO 2: Released in 1974. The average weight of each fruit is 1.5-2kg. The fruit contains orange color flesh. It gives an average yield of 100qtl/acre. The variety gets mature in 135 days.
CO1, ArkaSuryamukhi, PusaViswesh, TCR 011, Ambilli and ArkaChandan are the important varieties of Pumpkin.
बीज की मात्रा
कद्दू के लिए 1 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
उपचार
बिजाई से पहले, बीज को 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें। इससे इनकी अंकुरण प्रतिशतता में वृद्धि होती है। मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें। रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यिूडोमोनास फ्लूरोसेंस 10 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें।
बुआई का समय
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है।
फासला
प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।
गहराई
बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए।
बिजाई का ढंग
गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है।
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| UREA | DAP or SSP | MOP | ZINC | |
| 90 | 125 | 35 | – | |
आर्गेनिक खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| BIO-DAP | MIX FERTILIZER | Organic NPK | |
| 150 | 100 | 100 | |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
| N | P2O5 | K |
| 40 | 20 | 20 |
बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद व कम्पोस्ट 15 टन प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो), और पोटाश 15 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 किलो) प्रति एकड़ में डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें।
खरपतवारो को रोकने के लिए हाथों से गोडाई और निराई करें। खरपतवारो की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए 2 सप्ताह के पौधों को गोडाई करते रहें।
बीज को बोने के बाद तुरंत सिंचाई की आवश्यकता होती है और फिर मौसम के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करें। इस फसल को कुल 9-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
पौधे की देखभाल  
चेपा और थ्रिप्स:
चेपा और थ्रिप्स: ये कीट पत्तों से रस चूसते हैं जिसके कारण पत्ते पीले पड़ जाते हैं और गिर जाते हैं। थ्रिप्स के कारण पत्ते मुड़ जाते हैं। पत्ते कप के आकार के या ऊपर की तरफ मुड़ जाते हैं।
: यदि इनका हमला खेत में दिखे तो थाइमैथोक्सम 5 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
फल की मक्खी :
फल की मक्खी से फसल को बचाने के लिए नीम का तेल 3.0 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें।
सफेद धब्बे :
सफेद धब्बे : पत्तों की ऊपरी सतह पर सफेद रंग के धब्बे विकसित हो जाते हैं। ये धब्बे प्रभावित पौधे के मुख्य तने पर भी पड़ जाते हैं। इसके कीट पौधे को अपने भोजन के रूप में प्रयोग करते हैं। गंभीर हमले के कारण पत्ते गिर जाते हैं और फल समय से पहले ही पक जाते हैं।
इससे बचाव के लिए कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम को 1 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इसे फंगसनाशी जैसे क्लोरोथालोनिल, बेनोमाइल या डिनोकैप की स्प्रे से भी नियंत्रित किया जा सकता है।
पत्तों के निचले हिस्सों पर धब्बा रोग
चितकबरे रोग से बचाव के लिए डायाज़िनोन डालें। इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस एल 7 मि.ली. को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
एंथ्राक्नोस :
एंथ्राक्नोस : एंथ्राक्नोस से प्रभावित पत्ते झुलसे हुए दिखाई देते हैं।
As a preventive measure, treat seed with Carbendazim@2gm/kg of seed. If infestation is observed in field, take spray of Mancozeb@2gm or Carbendazim@3gm/liter of water.
सूखा:
सूखा रोग :यह एरविनिया टरैकीफिला के कारण होता है। यह पौधे की विशिष्ट कोशिकाओं को प्रभावित करता है जिसके कारण पौधा तुरंत सूख जाता है।
बैक्टीरियल सूखे से बचाव के लिए कीटनाशक की फोलियर स्प्रे करें।
फसल की कटाई
बिजाई के 60-80 दिनों के बाद किस्म और मौसम के आधार पर पहली तुड़ाई करें। फल बनने के 7 दिनों के बाद तुड़ाई की जाती है। तुड़ाई 2-3 दिनों के अंतराल पर की जानी चाहिए।
बीज उत्पादन
चप्पन कद्दू की अन्य किस्मों से 800 मीटर का फासला रखें। इसकी तीन जांच - पहली फूल निकलने से पहले, दूसरी फूल निकलने के समय और फल बनने के समय और तीसरी फल की तुड़ाई के समय की जानी चाहिए। बीमारी से प्रभावित पौधों और अन्य किस्मों के पौधों को निकाल दें। फल के गहरे पीले से संतरी रंग का हो जाने पर बीज लेने के लिए फल की तुड़ाई की जाती है। तोड़े गए फल को दो भागों में काटें और हाथ के द्वारा बीज निकाल लें। उसके बाद बीजों को पानी से धोयें और फल के गुद्दे को निकाल दें। निकाले गए बीजों को सुखाएं। इसकी औसतन पैदावार 2-2.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।